शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

अजनबी

लिखने की तिथी - 29-30/08/1976

बहुत आसान है -
गुनगुनाना किसी छायादार पेड़ के तले।
उतना ही आसान है –
किसी सभा या सम्मेलन में -
भाषण देना भी।
पर दोष देखना भी है बहुत सरल,
पर उपदेश भी कुशल बहुतेरे,
कठिन बस केवल –
अपने से अपनी पहचान करानी।
तुम्हारी तो तुम जानो –
मैने जब-जब भी स्वयं को
सत्य की कसौटी पर तोलना चाहा,
स्वयं को स्वयं से ही अजनबी पाया।

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